क्यों फरेब में जीती हो ,
शक्ति हो तुम . . . . . .
आततायी हो जाये पुरुष,
तो ज्वाला हो तुम . . . . . .
रक्षक जब लूटे मर्यादा ,
काल बनकर वरष पड़ो ,
महाकाली हो तुम . . . . . .
लाशो से आशा निरर्थक ,
रक्षा स्वयँ करनी होगी ,
देवी स्वरुपा नारी ,
जगदाती हो तुम . . . . . ..
पुरुषत्हीन समाज हो जाए ,
ज्वाला वनकर दहको ,
कोई नजर बुरी ना होगी ,
यहाँ वीरांगना हो तुम . .. . .
"जय"
03/10/13
शक्ति हो तुम . . . . . .
आततायी हो जाये पुरुष,
तो ज्वाला हो तुम . . . . . .
रक्षक जब लूटे मर्यादा ,
काल बनकर वरष पड़ो ,
महाकाली हो तुम . . . . . .
लाशो से आशा निरर्थक ,
रक्षा स्वयँ करनी होगी ,
देवी स्वरुपा नारी ,
जगदाती हो तुम . . . . . ..
पुरुषत्हीन समाज हो जाए ,
ज्वाला वनकर दहको ,
कोई नजर बुरी ना होगी ,
यहाँ वीरांगना हो तुम . .. . .
"जय"
03/10/13
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