वो कहते है हम निर्दोश है दँगो मैँ ,
अगर भीषण आग न लगी होती ,
तो धुँआ आज तक ना उठता . . . .
"जय" 16/07/13
उनके आँसुओ का सैलाब ,
तेरे शहर को कहीँ बहा ना दे . . .
उनके दिल का घुमड़ता दर्द ,
तेरी हस्ती को कहीँ मिटा ना दे . . .
मै सोचता हूँ कभी कभी "जय" ,
रब का इँसाफ तेरा नामो निशा मिटा ना दे . . . .
जय कुमार जैन 17
ना हिँदु बनाया था उसने ,
ना मुसलमान बनाया था ,
एक संपूर्ण धरा पर तुझे ,
खूबसूरत दिल के साथ ,
बेसकीमती इंसान बनाया था ,
तूने उसको भी बाँट दिया ,
अपनी खुदगरजी मै पड़कर ,
तू क्या बन गया यहाँ ,
उसने तुझे क्या बनाया था . . .
"जय" 17
तेरे दर आ गये अब क्या मँगाये ,
यही तो आखरी ख्वायिश थी मेरी . . .
'जय' 20
हम टूटकर चाहते थे ,
तुम दीवाना कहकर ,
मुजे मजाक बना गये . . . .
मै इँतजार करता रहा ,
वो किसी की वगिया की ,
शोभा बड़ा गये . . . .
मैँ कभी रोता नही था ,
यादो के झरोखे तेरे ,
मुझको रुला गये . . . .
समुंदर से भिड़ने चला,
खाक होकर हम ,
लहरो मैँ समा गये . . .
"जय" 20
हम वक्त को यूँ ही निकालते गये ,
एक दिन ऐसा वक्त आया ,
उसने हमे ही निकाल दिया . . . . .
"जय" 20
मन तन धन से पूजियो ,
गुरु ज्ञान की खान ।
जीवन भर उपकार रहे ,
दिया हमेँ जो ज्ञान ।।
"जय" 22
अगर भीषण आग न लगी होती ,
तो धुँआ आज तक ना उठता . . . .
"जय" 16/07/13
उनके आँसुओ का सैलाब ,
तेरे शहर को कहीँ बहा ना दे . . .
उनके दिल का घुमड़ता दर्द ,
तेरी हस्ती को कहीँ मिटा ना दे . . .
मै सोचता हूँ कभी कभी "जय" ,
रब का इँसाफ तेरा नामो निशा मिटा ना दे . . . .
जय कुमार जैन 17
ना हिँदु बनाया था उसने ,
ना मुसलमान बनाया था ,
एक संपूर्ण धरा पर तुझे ,
खूबसूरत दिल के साथ ,
बेसकीमती इंसान बनाया था ,
तूने उसको भी बाँट दिया ,
अपनी खुदगरजी मै पड़कर ,
तू क्या बन गया यहाँ ,
उसने तुझे क्या बनाया था . . .
"जय" 17
तेरे दर आ गये अब क्या मँगाये ,
यही तो आखरी ख्वायिश थी मेरी . . .
'जय' 20
हम टूटकर चाहते थे ,
तुम दीवाना कहकर ,
मुजे मजाक बना गये . . . .
मै इँतजार करता रहा ,
वो किसी की वगिया की ,
शोभा बड़ा गये . . . .
मैँ कभी रोता नही था ,
यादो के झरोखे तेरे ,
मुझको रुला गये . . . .
समुंदर से भिड़ने चला,
खाक होकर हम ,
लहरो मैँ समा गये . . .
"जय" 20
हम वक्त को यूँ ही निकालते गये ,
एक दिन ऐसा वक्त आया ,
उसने हमे ही निकाल दिया . . . . .
"जय" 20
मन तन धन से पूजियो ,
गुरु ज्ञान की खान ।
जीवन भर उपकार रहे ,
दिया हमेँ जो ज्ञान ।।
"जय" 22
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