ईमान की लाश लेकर ,
इंसाफ का व्यापार होने लगा . .
सरस्वती के मंदिर मेँ ,
अज्ञान का व्यवहार होने लगा . .
इक रोग है जो हमारी ,
नशोँ मेँ दौड़ रहा है आज
इक राग जो हर बाजे पर ,
बेवजह बज रहा है आज
मेरी मुहब्बत के जनाजे पर ,
वासनाओँ का मेल होने लगा . . .
हर बाजार यहाँ सजा ,
लायक खरीददार चाहिए
हर दुआ कबूल हो जाती ,
माकूल माहौल चाहिए
जिसको ना मिला मौका ,
वह ईमानदार होने लगा . . .
"जय कुमार 22/11/2013
इंसाफ का व्यापार होने लगा . .
सरस्वती के मंदिर मेँ ,
अज्ञान का व्यवहार होने लगा . .
इक रोग है जो हमारी ,
नशोँ मेँ दौड़ रहा है आज
इक राग जो हर बाजे पर ,
बेवजह बज रहा है आज
मेरी मुहब्बत के जनाजे पर ,
वासनाओँ का मेल होने लगा . . .
हर बाजार यहाँ सजा ,
लायक खरीददार चाहिए
हर दुआ कबूल हो जाती ,
माकूल माहौल चाहिए
जिसको ना मिला मौका ,
वह ईमानदार होने लगा . . .
"जय कुमार 22/11/2013
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