रातोँ से ना जाने कैसा बैर है मेरा ,
आगोश मै लेकर मुझे सुलाती ही नहीँ . . .
'जय' . . . .23/07 /13
पढ़ा लिखा के तोय ,
लगा दियो जीवन ।
तू जब लायक भयो ,
भेज दियो मोहे वन ।।
"जय" 23
जीवन भर पूजा किये ,
घर मैँ रखे भगवान ।
घर मैँ माता पिता के ,
रोते निकले प्रान ।।
"जय" 24
शराब को गुनाहगार क्योँ ठहराते हो ,
जब पीने वाले ही काफिर है . . .
"जय" 24
जोगी तेरे जोग ने ,
लगा दिया क्या रोग ।
राजनीति हम सीख गये ,
सीखन आये थे योग ।।
"जय" 25
मन , मोह टूट गयो तुमसे ,
अब आये राजकुमार ।
लाल , छोड़ दियो तुमको ,
अब मोदी करेँ प्रचार ।।
"जय" 26
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
सामने आकर भी वो अब अनजान बनते है
28
आगोश मै लेकर मुझे सुलाती ही नहीँ . . .
'जय' . . . .23/07 /13
पढ़ा लिखा के तोय ,
लगा दियो जीवन ।
तू जब लायक भयो ,
भेज दियो मोहे वन ।।
"जय" 23
जीवन भर पूजा किये ,
घर मैँ रखे भगवान ।
घर मैँ माता पिता के ,
रोते निकले प्रान ।।
"जय" 24
शराब को गुनाहगार क्योँ ठहराते हो ,
जब पीने वाले ही काफिर है . . .
"जय" 24
जोगी तेरे जोग ने ,
लगा दिया क्या रोग ।
राजनीति हम सीख गये ,
सीखन आये थे योग ।।
"जय" 25
मन , मोह टूट गयो तुमसे ,
अब आये राजकुमार ।
लाल , छोड़ दियो तुमको ,
अब मोदी करेँ प्रचार ।।
"जय" 26
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
सामने आकर भी वो अब अनजान बनते है
28
बसेरे तोड़कर मेरे तुजको क्या मिला जालिम ,
एक बसेरा सँवारने मैँ जिँदगी निकल जाती है . . . .
'जय' 29
एक बसेरा सँवारने मैँ जिँदगी निकल जाती है . . . .
'जय' 29
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