Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

रातोँ से ना जाने कैसा बैर है मेरा , 
आगोश मै लेकर मुझे सुलाती ही नहीँ . . .
'जय' . . . .23/07 /13


 

पढ़ा लिखा के तोय , 
लगा दियो जीवन । 
तू जब लायक भयो , 
भेज दियो मोहे वन ।। 
"जय" 23

 
जीवन भर पूजा किये , 
घर मैँ रखे भगवान । 
घर मैँ माता पिता के , 
रोते निकले प्रान ।। 
"जय" 24

 
शराब को गुनाहगार क्योँ ठहराते हो , 
जब पीने वाले ही काफिर है . . .
"जय" 24

 
जोगी तेरे जोग ने , 
लगा दिया क्या रोग । 
राजनीति हम सीख गये , 
सीखन आये थे योग ।। 
"जय"  25

 
मन , मोह टूट गयो तुमसे , 
अब आये राजकुमार । 
लाल , छोड़ दियो तुमको , 
अब मोदी करेँ प्रचार ।। 
"जय" 26

 
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
 सामने आकर भी वो अब अनजान बनते है 
28




बसेरे तोड़कर मेरे तुजको क्या मिला जालिम , 
एक बसेरा सँवारने मैँ जिँदगी निकल जाती है . . . .
'जय' 29


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