Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

कोई अर्श पर है कोई फर्श पर , 
सब मुकद्दर की बाते है , 
कोई रोड पर ठोकर खाता है , 
कोई मंदिर मैँ पूजा जाता है. . . 
"जय" शुभ रात्रि दोस्तो
11/07/13


ठोकर जो लगेगी दिल पर तो कोई याद आयेगा तुजको । 
तेरी आँखो मैँ बसकर रुलायेगा तुजको । 
प्यार के जज्वात से खेलकर , 
कौन खुश रह पाया है यहाँ , 
समुंदर मैँ रहकर भी प्यास तडपायेगी जब "जय" , 
तब आकाश से कुछ मोतियोँ की बूँदे लायेगा तुजको . . . .
12/07/2013



मैँने हर गजल मैँ उसको पाया 
हर एक शेर ने मुझको तडपाया 
हर साज ने किया बेहाल , 
हर नज्म ने अब मुझे रुलाया 
टूट तो कबका जाता , 
ये दिल तोँडू तो कैसे "जय" , 
जिसमे है तेरा प्यार समाया . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो . .13/07/2013




सियासत मैँ आज हर आदमी ठगा सा लगता है । 
मेरे देश की आवो हवा मैँ जहर मिला सा लगता है . . . 
अब राष्ट्रवाद के अर्थ ही बदल गये , 
अब मेरा राष्ट्र ही बँटा लगता है . . .
"जय"14/07/2013



तुजे खोकर कोई चारा ना रहा , 
इसलिए मैँने शादी करली । 
शादी के वाद कोई चारा ना रहा , 
इसलिए मैँने अपनी बर्वादी करली । 
बर्वादी के वाद चारा ना था , 
तो यमराज से यारी करली . . . 
"जय"  15/07/2013


ये आग मेरे देश मैँ किसने लगाई है , 
जख्म देने पर क्योँ तुले हो तुम ? 
यहाँ वसे हम सदियो से दोस्त वनकर , 
साप्रदायिकता की चिँगारी तुमने क्योँ सुलगाई है . . .
आज राष्टवाद के मायने वदल रहे हो , 
कल राष्ट बदलने की नौबत तुमने वनाई है . . .
इतिहास गवाह है खोलकर देख लो , 
इस सोच ने केवल हानि ही हानि पाई है . .
"जय"  15/07/2013




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