कोई अर्श पर है कोई फर्श पर ,
सब मुकद्दर की बाते है ,
कोई रोड पर ठोकर खाता है ,
कोई मंदिर मैँ पूजा जाता है. . .
"जय" शुभ रात्रि दोस्तो
11/07/13
ठोकर जो लगेगी दिल पर तो कोई याद आयेगा तुजको ।
तेरी आँखो मैँ बसकर रुलायेगा तुजको ।
प्यार के जज्वात से खेलकर ,
कौन खुश रह पाया है यहाँ ,
समुंदर मैँ रहकर भी प्यास तडपायेगी जब "जय" ,
तब आकाश से कुछ मोतियोँ की बूँदे लायेगा तुजको . . . .
12/07/2013
मैँने हर गजल मैँ उसको पाया
हर एक शेर ने मुझको तडपाया
हर साज ने किया बेहाल ,
हर नज्म ने अब मुझे रुलाया
टूट तो कबका जाता ,
ये दिल तोँडू तो कैसे "जय" ,
जिसमे है तेरा प्यार समाया . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो . .13/07/2013
सियासत मैँ आज हर आदमी ठगा सा लगता है ।
मेरे देश की आवो हवा मैँ जहर मिला सा लगता है . . .
अब राष्ट्रवाद के अर्थ ही बदल गये ,
अब मेरा राष्ट्र ही बँटा लगता है . . .
"जय"14/07/2013
तुजे खोकर कोई चारा ना रहा ,
इसलिए मैँने शादी करली ।
शादी के वाद कोई चारा ना रहा ,
इसलिए मैँने अपनी बर्वादी करली ।
बर्वादी के वाद चारा ना था ,
तो यमराज से यारी करली . . .
"जय" 15/07/2013
ये आग मेरे देश मैँ किसने लगाई है ,
जख्म देने पर क्योँ तुले हो तुम ?
यहाँ वसे हम सदियो से दोस्त वनकर ,
साप्रदायिकता की चिँगारी तुमने क्योँ सुलगाई है . . .
आज राष्टवाद के मायने वदल रहे हो ,
कल राष्ट बदलने की नौबत तुमने वनाई है . . .
इतिहास गवाह है खोलकर देख लो ,
इस सोच ने केवल हानि ही हानि पाई है . .
"जय" 15/07/2013
सब मुकद्दर की बाते है ,
कोई रोड पर ठोकर खाता है ,
कोई मंदिर मैँ पूजा जाता है. . .
"जय" शुभ रात्रि दोस्तो
11/07/13
ठोकर जो लगेगी दिल पर तो कोई याद आयेगा तुजको ।
तेरी आँखो मैँ बसकर रुलायेगा तुजको ।
प्यार के जज्वात से खेलकर ,
कौन खुश रह पाया है यहाँ ,
समुंदर मैँ रहकर भी प्यास तडपायेगी जब "जय" ,
तब आकाश से कुछ मोतियोँ की बूँदे लायेगा तुजको . . . .
12/07/2013
मैँने हर गजल मैँ उसको पाया
हर एक शेर ने मुझको तडपाया
हर साज ने किया बेहाल ,
हर नज्म ने अब मुझे रुलाया
टूट तो कबका जाता ,
ये दिल तोँडू तो कैसे "जय" ,
जिसमे है तेरा प्यार समाया . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो . .13/07/2013
सियासत मैँ आज हर आदमी ठगा सा लगता है ।
मेरे देश की आवो हवा मैँ जहर मिला सा लगता है . . .
अब राष्ट्रवाद के अर्थ ही बदल गये ,
अब मेरा राष्ट्र ही बँटा लगता है . . .
"जय"14/07/2013
तुजे खोकर कोई चारा ना रहा ,
इसलिए मैँने शादी करली ।
शादी के वाद कोई चारा ना रहा ,
इसलिए मैँने अपनी बर्वादी करली ।
बर्वादी के वाद चारा ना था ,
तो यमराज से यारी करली . . .
"जय" 15/07/2013
ये आग मेरे देश मैँ किसने लगाई है ,
जख्म देने पर क्योँ तुले हो तुम ?
यहाँ वसे हम सदियो से दोस्त वनकर ,
साप्रदायिकता की चिँगारी तुमने क्योँ सुलगाई है . . .
आज राष्टवाद के मायने वदल रहे हो ,
कल राष्ट बदलने की नौबत तुमने वनाई है . . .
इतिहास गवाह है खोलकर देख लो ,
इस सोच ने केवल हानि ही हानि पाई है . .
"जय" 15/07/2013
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