Saturday, 9 November 2013

बचपन

वो बचपन की गुड़िया दिला दे कोई . . .
वो बचपन की गलियाँ लौटा दे कोई . . .

गाँव मेँ बो दूर तलक भाग कर जाना ,
यारोँ के संग वो अमरुद बेरोँ को खाना ,
वो मेरी रंगीनियाँ लौटा दे कोई . . .

गाँव का बूड़ा बरगद जिसकी छाँव मेँ ,
खेला करता था मेरा मासूम बचपन ,
वो मेरे दादी की कहानी लौटा दे कोई . . .

टीलोँ पर चड़कर वहाँ से खिसकना ,
पेड़ोँ की डालोँ पर वो कूंदकर चढ़ना ,
वो मेरे बचपन के घरोँदे लौटा दे कोई . . .

वो गाय के संग दूर तलक जाना ,
खेतोँ मेँ मटर को चुन चुन खाना ,
वो मेरे मस्ती के दिन लौटा दे कोई . . .

वो कपड़े की गेँद वो गिल्ली डंडा ,
बावड़ी के पानी मेँ कूंदकर उछलना ,
वो मेरे खूबसूरत पल लौटा दे कोई . . .

वो माँ की मीठी फटकार बापु का प्यार ,
दादी की लाठी पर दादू का हँसना ,
वो मेरे दादा दादी लौटा दे कोई . . .

बहिन को चिढ़ाना भैया को छकाना , 
दोस्तोँ के संग स्कूल से घर पर आना ,
वो मेरे अनमोल पल लौटा दे कोई . . .

"जय" 8/11/13

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