Monday, 25 November 2013

हम तो नेता है

हम तो नेता है हमारा भरोसा कैँसा . .
आते है सालोँ मेँ हमारा बसेरा कैँसा . . .

रहते कहाँ है हम ईमान के सहारे ,
करते है गोरख धंधे ईमान के सारे ,
बैँचा हो खुदको उसका ईमान कैँसा . .

बंदगी करते है कुर्सी की हर पल,
जुगत लगाते पैसा बने हर पल ,
वोट का नाता है तुमसे रिस्ता कैँसा . . .

एक दिन विधान सभा हम जायेँगे ,
मौका मिला तो मिनिस्टर पद पायेँगे,
मेरा तो सब हो गया फिर डर कैँसा . . .

कुछ खायेँगे कुछ अपनो को खिलायेँगे ,
साथ राम का तो सी एम भी बन जायेँगे ,
खेलता हूँ भावनाओँ से मेरा मजहब कैँसा . . .

"जय कुमार" 23/11/2013

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