यह जलजला है कैंसा कहाँ जाऊँ।
तेरे पहलु में लिपटकर छुप जाऊँ।
दर्द ए मुहब्बत की ,,, दास्ताँ है ये ,
महबूब को ढ़ूडकर ,,,,, कैंसे लाऊँ।
उसको पाने की ,, आरजू हरदम ,
दिल के छालो को में कैसे छुपाऊँ।
बेगार हो गया अब ,,,,,, मेरा शहर ,
एक झलक तेरी झलक कैंसे पाऊँ ।
आसमां पर बिजली जमीं पर कहर ,
दोनों जहां लुटते,,,, अब कहाँ जाऊँ ।
फिर बबंडर उठा है ,,,,, मेरे दिल मेँ ,
जय लगता सारी ,,,, हदें लाँग जाऊँ।
"जय कुमार"25/11/13
तेरे पहलु में लिपटकर छुप जाऊँ।
दर्द ए मुहब्बत की ,,, दास्ताँ है ये ,
महबूब को ढ़ूडकर ,,,,, कैंसे लाऊँ।
उसको पाने की ,, आरजू हरदम ,
दिल के छालो को में कैसे छुपाऊँ।
बेगार हो गया अब ,,,,,, मेरा शहर ,
एक झलक तेरी झलक कैंसे पाऊँ ।
आसमां पर बिजली जमीं पर कहर ,
दोनों जहां लुटते,,,, अब कहाँ जाऊँ ।
फिर बबंडर उठा है ,,,,, मेरे दिल मेँ ,
जय लगता सारी ,,,, हदें लाँग जाऊँ।
"जय कुमार"25/11/13
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