"रावण कुम्भकरण के पुतले ,
सदियोँ से जलाये ,
इस दशहरा कुछ बदलना चाहिए . . . .
जिनने किया देश को शर्मसार ,
उन दिल्ली के दरिंद्रोँ के ,
पुतले जलने चाहिए . . . .
राम का आचरण दुर्लभ ,
रावण के आचरण से भी,
नीचे जा रहा समाज ,
बुराई के प्रतीकोँ को अब ,
बदल देना चाहिए . . . . .
सदियोँ से पड़ी पुराणो पर ,
मैली हो चुकी चादर ,
उस चादर को अब ,
बदल देना चाहिए . . . . . ,
वश्त्र जोगी के पहनेँ ,
भोगोँ मेँ रहे जो लिप्त ,
बेईमान को सम्मान ,
समय बदल गया है अब ,
कुछ परंपराओ को ,
बदल देना चाहिए . . . . .
समाज की बीमारियोँ से ,
मुश्किल हुआ जीवन ,
करनी होगी सफाई ,
क्योँ ना इस बार से अब ,
आगाज कर देना चाहिए . . . "जय"
सदियोँ से जलाये ,
इस दशहरा कुछ बदलना चाहिए . . . .
जिनने किया देश को शर्मसार ,
उन दिल्ली के दरिंद्रोँ के ,
पुतले जलने चाहिए . . . .
राम का आचरण दुर्लभ ,
रावण के आचरण से भी,
नीचे जा रहा समाज ,
बुराई के प्रतीकोँ को अब ,
बदल देना चाहिए . . . . .
सदियोँ से पड़ी पुराणो पर ,
मैली हो चुकी चादर ,
उस चादर को अब ,
बदल देना चाहिए . . . . . ,
वश्त्र जोगी के पहनेँ ,
भोगोँ मेँ रहे जो लिप्त ,
बेईमान को सम्मान ,
समय बदल गया है अब ,
कुछ परंपराओ को ,
बदल देना चाहिए . . . . .
समाज की बीमारियोँ से ,
मुश्किल हुआ जीवन ,
करनी होगी सफाई ,
क्योँ ना इस बार से अब ,
आगाज कर देना चाहिए . . . "जय"
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