Tuesday, 5 November 2013

चेहरा

चेहरा पर चेहरे लगाये है हमने . . 
आडम्बर के सपने सजाये है हमने . . .
बातोँ मेँ मीठा दिल मेँ जहर , 
समाज मेँ सेवक घर मेँ कहर ,
बनावटी फूलोँ से घर सजाये है हमने . . .
मंदिर मेँ भक्त बनते अब कमवक्त ,
जिनके काले कामोँ से रोता है बक्त ,
अंधो को आईना दिखाये है हमने . . . . 
ईमान का डोँग करते सभाओँ मेँ ,
पीठ पर छुरा खोँफते भरोसे की राहोँ मेँ ,
काली करतूत से घर बसाये है जिनने . . .
रहनुमा बनकर बैठे ईश्वर के भक्त ,
आस्थाओँ का उपयोग करते जो हर वक्त ,
वासनाओँ के पुजारिओँ को ,
ईश्वर के रक्षक बनायेँ है हमने . . .
सफेद कपड़ो मेँ काले जहरीले नाग ,
मदमस्त हैँ जो पीकर कुर्सी की भांग ,
ऐसे लोगो से शासन चलवाये है हमने . . .
"जय" २०/१०/२०१३ 

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