वो राहेँ वीरान हो गई ,
जहाँ खेलता था जीवन . . .
आँगन भी ना रहा जहाँ ,
खिलखिलाता था बचपन . .
इस नफरत की आग मेँ ,
कब तक जलोँगे जलाओगे,
एक दीप तो जलाओ प्रेम से,
फिर चहक उठेगा मधुवन . .
"जय" २५ /१० /२०१३
जहाँ खेलता था जीवन . . .
आँगन भी ना रहा जहाँ ,
खिलखिलाता था बचपन . .
इस नफरत की आग मेँ ,
कब तक जलोँगे जलाओगे,
एक दीप तो जलाओ प्रेम से,
फिर चहक उठेगा मधुवन . .
"जय" २५ /१० /२०१३
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