Tuesday, 5 November 2013

बिटिया

बेटी है बगिया का फूल ।
बेटी है जीवन का मूल ।।

बेटी है अंधेरे मेँ उजाला ।
बेटी है एक प्रेम प्याला ।।

बेटी है मधुवन का राग ।
बेटी है जीवन का जाग ।।

बेटी है रब की इबादत ।
बेटी है जग की इबादत ।।

बेटी है सुवह का सूरज ।
बेटी है ईश्वर की मूरत ।।

बेटी है आँगन की शोभा ।
बेटी है परिवार की आभा ।।

बेटी है दो कुलोँ की आन ।
बेटी है मातपिता का मान ।।

बेटी है हर मुश्किल हल ।
बेटी है समाज का सम्बल।।

"जय"  08/10/13 बिटिया


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