बेटी है बगिया का फूल ।
बेटी है जीवन का मूल ।।
बेटी है अंधेरे मेँ उजाला ।
बेटी है एक प्रेम प्याला ।।
बेटी है मधुवन का राग ।
बेटी है जीवन का जाग ।।
बेटी है रब की इबादत ।
बेटी है जग की इबादत ।।
बेटी है सुवह का सूरज ।
बेटी है ईश्वर की मूरत ।।
बेटी है आँगन की शोभा ।
बेटी है परिवार की आभा ।।
बेटी है दो कुलोँ की आन ।
बेटी है मातपिता का मान ।।
बेटी है हर मुश्किल हल ।
बेटी है समाज का सम्बल।।
"जय" 08/10/13 बिटिया
बेटी है जीवन का मूल ।।
बेटी है अंधेरे मेँ उजाला ।
बेटी है एक प्रेम प्याला ।।
बेटी है मधुवन का राग ।
बेटी है जीवन का जाग ।।
बेटी है रब की इबादत ।
बेटी है जग की इबादत ।।
बेटी है सुवह का सूरज ।
बेटी है ईश्वर की मूरत ।।
बेटी है आँगन की शोभा ।
बेटी है परिवार की आभा ।।
बेटी है दो कुलोँ की आन ।
बेटी है मातपिता का मान ।।
बेटी है हर मुश्किल हल ।
बेटी है समाज का सम्बल।।
"जय" 08/10/13 बिटिया
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