Tuesday, 5 November 2013

माँ

माँ से ही महानता है ।
माँ से ही समानता है ।।

माँ से ही मृदुलता है ।
माँ से ही सरलता है ।।

माँ से ही जीवटता है ।
मा से ही अमिटता है ।।

माँ से ही मस्जिद है ।
माँ से ही मंदिर है ।।

माँ से ही हमारा जहाँ ।
माँ से ही चमके जहाँ ।।

माँ से ही मुरली आई ।
माँ से ही मिर्दँग सुनाई ।।

माँ से ही राग बनेँ है ।
माँ से ही साज बनेँ है ।।

माँ से ही मुशकान है ।
माँ से ही हर गान है ।।

माँ से ही बनीँ ममता ।
माँ से ही बनीँ समता ।।

माँ से ही आसमान है ।
माँ से ही हर अरमान है ।।

माँ से ही ईश्वर की मूरत ।
माँ से ही जग की सूरत ।।

"जय" 

  17/10/2013

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