तन्हाई हिज्र की होती ही है अजीब ।
रोता है दिल जब उसके साथ होता रकीब ।।
संगदिल तेरी ख्वायिस मेँ, हम ना थे ,
जो आज तू रहता है गैर के करीब ।।
"जय" शुभ संध्या मित्रो !
रोता है दिल जब उसके साथ होता रकीब ।।
संगदिल तेरी ख्वायिस मेँ, हम ना थे ,
जो आज तू रहता है गैर के करीब ।।
"जय" शुभ संध्या मित्रो !
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