Monday, 25 November 2013

अब वोट माँगने आ गये

आज फिर बिजली गिराने वाले ,
अब वोट माँगने आ गये . . .
बिन मौसम के बरसात कर रहे ,
अब मोती चुराने आ गये . . .

सपने विकास के दिखा रहे है वो ,
सफेद पोशाक गुनाह छुपा रहे है वो ,
दिन मेँ ही तारोँ को गिना रहे है वो ,
अब वादे गिनाने आ गये . . .

कुछ दिन का मेला फिर वही झमेला ,
परखना इनने अब कौनसा खेल खेला ,
अबकी बार तुम ना गलती करना ,
ये फिर चोट मारने आ गये . . .

हमारे वोट से होता जीवंत लोकतंत्र ,
कायम रखना है हमेँ सुचारु प्रजातंत्र ,
अपने विवेक का करना है उपयोग ,
ये झूठा राग सुनाने आ गये . . . .

"जय कुमार" 23/11/2013

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