Thursday, 28 November 2013

मेरी तन्हाई

कोई समझे ना समझे मेरी
तन्हाई को कोई बात नहीँ ।
कोई समझे ना समझे तेरी
जुदाई को कोई बात नहीँ ।
तूने ही ना समझा मुझको
यह दर्द देता है रहरहकर ,
अब कोई समझे ना समझे
मेरे गम को कोई बात नहीँ।।

आज भी तेरा वो शर्माना
तकलीफ देता है दोस्त ।
तेरा वो अपनापन जताना
तकलीफ देता है दोस्त ।
जब बिछड़े थे हम वो तेरी
आँसुओ से भारी आँखे ,
दूर तलक मुड़कर देखना
तकलीफ देता है दोस्त ।।

कुछ ना कर आज तू बस
मुझे असली चेहरा दिखा दे।
अपने अंदर के वेवफाई के
उस शहजादे से मिला दे ।
योँ तो जिंदगी निकाल लेगेँ
तेरी यादोँ के सहारे हम ,
तसल्ली कर लेगेँ हम भी
बस अपने मुंह से बता दे । ।

"जय कुमार" 26/11/2013

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