Saturday, 9 November 2013

माँ को समर्पित

 ८ /११/१३  को  हमारे बड़े भैया श्री MANOJ DIXIT JI 
जयपुर , परमपूज्य माँ स्व श्रीमती सरस्बती देवी 
की पुण्य स्मृति पर मेरे ह्रदय के भाव जो सजल आँखों 
से माँ  के श्री चरणो  को समर्पित किये।

माँ जब जब याद सताती है तुम्हारी . . 
आँखोँ मेँ आँसु दिल मेँ हसरतेँ होती है हमारी . .
एक बार बेटा सुनने को तड़प जाता मन , 
ज्योँ रुक सा जाता है हमारा जीवन , 
जमाने की रंगीनियाँ क्या काम की है हमारी . . . 

अब तेरा बेटा तेरे बिन अधूरा सा है माँ , 
अब तेरा बेटा तेरे बिन टूटा सा है माँ , 
फिर सहला जाओ यह आस है हमारी . . . 

वो चूल्हे की सोंधी रोटी तेरे हांथो की माँ , 
वो झूठी सी झपट तेरी बातों की माँ , 
एक बार फिर मिल जाये दिल कहता है हमारा . . . 

स्कूल से लौटता था राह देखती थी तुम माँ , 
अपने हाथोँ से निवाला खिलाती थी तुम माँ , 
फिर लौट आयेँ मेरे वो दिन आरजू है हमारी . . .  माँ को समर्पित

कई बार अनजाने मेँ मैँने दुखाया दिल तेरा , 
लेकिन हर बार माफ किया माँ तुमने मुझको , 
फिर माँ दूर फलक पर क्योँ किया है बसेरा . . . 

जब जब स्वप्न मेँ आती हो तुम माँ , 
बहुत ही हर्षित कर जाती हो माँ , 
एक बार फिर आ जाओँ यह हसरत है हमारी . . . 

बेशक आप स्वर्ग मेँ हो मेरी माँ , 
पर मेरा स्वर्ग तो तुमारे चरणोँ मेँ है माँ , 
अब तुमारे चरणोँ की रज ही सहारा है हमारा . . 

 "जय" सादर शत् शत् नमन माँ आपको !

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