Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

जीवन मेँ कुछ लोग ,
अपने योँ बन जाते है ।
हमारे बाग मेँ फूल बनकर ,
खिल जाते है . . .
याद आती है जब ,
वो मीठी सी यादे ,
कभी खुशी ,
कभी आँसु ,
निकल आते है . . . .
दोस्त बनकर आये थे ,
मेरी जिँदगी मेँ तुम ,
भावुक हो जाते है जब ,
भाई बन बिछड़ जाते है . . .
साथ ना रहा पर ,
दिल मेँ समा गये हो ,
जब याद आती है ,
तो अरमान मचल जाते है . . . .
"जय" शुभ संध्या मित्रो !  22/09/13


No comments:

Post a Comment