मुझे योँ बुजी हुई निगाहो से ना देख ,
मैँ जानता हूँ कि तु अभी आसमां मैँ चल रहा हैँ जय ,
पर आसमां मैँ जिँदगी बसर नही होती . . . .
. .3/07/2013
जब कोई बात आई तो तुम याद आये ,
जब मैँ पडा अकेला तो तुम याद आये ,
कल योँ ही चला गया उस पुराने शहर ,
वहाँ की गलियोँ के सवाल थे हजार ,
तो तुम याद आयेँ . . . .
'जय
'04/07/13
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
अब सामने आकर भी वो अनजान बनते है 04/07
कुछ बचा नही राख का ढेर है ,
हवाये आती है तो सहम जाते है ,
इंतजार है उसका सो समेते हुए है . . .
'जय' 05/07
बडे अदब से पेश आते हो 'जय' ,
क्या फिर कोई जख्म देने का इरादा है . . . . .
शुभ प्रभात . 06
कोई तारणहार आयेगा यह सोचकर अपने को कायर ना वनाये ,
किसी को तो आगाज करना ही होगा क्यो ना हम ही आगाजी बन जाये . . . .
'जय' . .
जिंदा है तो साँसो से शिकायत कैसी ,
मौत के बाद जिस्म की नुमाइश कैसी ।
मोहताज नहीँ वो जो जीते है जिँदादिली से ,
हँसना सीख लिया जब हर हाल मैँ "जय" ,
तो किसी से भला सिकायत कैसी . . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो 08
योँ बंदिशे ना लगा जालिम ,
मैँ तो दरिया हूँ ,
अपना रास्ता बनाना आता है मुझको . . . .
"जय" . . 09
मेरी तकदीर मैँ नहीँ ,
तेरी तकदीर मैँ नहीँ ,
उसकी तकदीर मैँ नहीँ ,
किसी की तकदीर मैँ नहीँ ,
तो बनाया ही क्योँ उसको ? . . . . .
"जय" 10
तनहाई हिज्र की होती ही है अजीब ।
रोता है दिल जब "जय", उसके साथ होता है रकीब . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो 10
योँ तो मैँ कभी रोता नहीँ ,
देखकर कुछ मंजर ,
ये आँखे भर आया करती है ।
कल चला गया शहर की सडको पर योँ ही ,
हजारो लोगो मैँ एक वृध्य से नजरे मिल गई ,
उनने बेटा जिस स्वर मैँ कहाँ ,
मुझे उस स्वर ने तारतम्य कर दिया ,
देखकर उनकी लाचारी ,
ये आँखे भर आया करती है . . . "
मैँ जानता हूँ कि तु अभी आसमां मैँ चल रहा हैँ जय ,
पर आसमां मैँ जिँदगी बसर नही होती . . . .
. .3/07/2013
जब कोई बात आई तो तुम याद आये ,
जब मैँ पडा अकेला तो तुम याद आये ,
कल योँ ही चला गया उस पुराने शहर ,
वहाँ की गलियोँ के सवाल थे हजार ,
तो तुम याद आयेँ . . . .
'जय
'04/07/13
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
अब सामने आकर भी वो अनजान बनते है 04/07
कुछ बचा नही राख का ढेर है ,
हवाये आती है तो सहम जाते है ,
इंतजार है उसका सो समेते हुए है . . .
'जय' 05/07
बडे अदब से पेश आते हो 'जय' ,
क्या फिर कोई जख्म देने का इरादा है . . . . .
शुभ प्रभात . 06
कोई तारणहार आयेगा यह सोचकर अपने को कायर ना वनाये ,
किसी को तो आगाज करना ही होगा क्यो ना हम ही आगाजी बन जाये . . . .
'जय' . .
जिंदा है तो साँसो से शिकायत कैसी ,
मौत के बाद जिस्म की नुमाइश कैसी ।
मोहताज नहीँ वो जो जीते है जिँदादिली से ,
हँसना सीख लिया जब हर हाल मैँ "जय" ,
तो किसी से भला सिकायत कैसी . . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो 08
योँ बंदिशे ना लगा जालिम ,
मैँ तो दरिया हूँ ,
अपना रास्ता बनाना आता है मुझको . . . .
"जय" . . 09
मेरी तकदीर मैँ नहीँ ,
तेरी तकदीर मैँ नहीँ ,
उसकी तकदीर मैँ नहीँ ,
किसी की तकदीर मैँ नहीँ ,
तो बनाया ही क्योँ उसको ? . . . . .
"जय" 10
तनहाई हिज्र की होती ही है अजीब ।
रोता है दिल जब "जय", उसके साथ होता है रकीब . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो 10
योँ तो मैँ कभी रोता नहीँ ,
देखकर कुछ मंजर ,
ये आँखे भर आया करती है ।
कल चला गया शहर की सडको पर योँ ही ,
हजारो लोगो मैँ एक वृध्य से नजरे मिल गई ,
उनने बेटा जिस स्वर मैँ कहाँ ,
मुझे उस स्वर ने तारतम्य कर दिया ,
देखकर उनकी लाचारी ,
ये आँखे भर आया करती है . . . "
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