Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

मुझे योँ बुजी हुई निगाहो से ना देख , 
मैँ जानता हूँ कि तु अभी आसमां मैँ चल रहा हैँ जय , 
पर आसमां मैँ जिँदगी बसर नही होती . . . .
. .3/07/2013

 

जब कोई बात आई तो तुम याद आये , 
जब मैँ पडा अकेला तो तुम याद आये , 
कल योँ ही चला गया उस पुराने शहर , 
वहाँ की गलियोँ के सवाल थे हजार , 
तो तुम याद आयेँ . . . .
'जय
'04/07/13

 
कदमो की आहट से जो पहचान लिया करते थे 'जय' ,
अब सामने आकर भी वो अनजान बनते है 04/07


कुछ बचा नही राख का ढेर है , 
हवाये आती है तो सहम जाते है , 
इंतजार है उसका सो समेते हुए है . . .
'जय' 05/07

 
बडे अदब से पेश आते हो 'जय' ,
क्या फिर कोई जख्म देने का इरादा है . . . . .
शुभ प्रभात . 06

कोई तारणहार आयेगा यह सोचकर अपने को कायर ना वनाये , 
किसी को तो आगाज करना ही होगा क्यो ना हम ही आगाजी बन जाये . . . .
'जय' . .


जिंदा है तो साँसो से शिकायत कैसी , 
मौत के बाद जिस्म की नुमाइश कैसी । 
मोहताज नहीँ वो जो जीते है जिँदादिली से , 
हँसना सीख लिया जब हर हाल मैँ "जय" , 
तो किसी से भला सिकायत कैसी . . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो 08

 
योँ बंदिशे ना लगा जालिम , 
मैँ तो दरिया हूँ , 
अपना रास्ता बनाना आता है मुझको . . . .
"जय" . . 09

 

मेरी तकदीर मैँ नहीँ , 
तेरी तकदीर मैँ नहीँ , 
उसकी तकदीर मैँ नहीँ , 
किसी की तकदीर मैँ नहीँ , 
तो बनाया ही क्योँ उसको ? . . . . .
"जय" 10



तनहाई हिज्र की होती ही है अजीब । 
रोता है दिल जब "जय", उसके साथ होता है रकीब . . . .
शुभ रात्रि दोस्तो   10



योँ तो मैँ कभी रोता नहीँ , 
देखकर कुछ मंजर , 
ये आँखे भर आया करती है । 
कल चला गया शहर की सडको पर योँ ही , 
हजारो लोगो मैँ एक वृध्य से नजरे मिल गई , 
उनने बेटा जिस स्वर मैँ कहाँ , 
मुझे उस स्वर ने तारतम्य कर दिया , 
देखकर उनकी लाचारी , 
ये आँखे भर आया करती है . . . "


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