Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

खून का रिस्ता ना हो , 
जहाँ विश्वास प्रबल हो । 
अहसास की खुशबु हो , 
वहाँ मित्रता अटल हो ।। 
'जय' 04/08/2013



"कौन कहता है कि हम ,
तुमे याद नहीँ करते , 
एक नजर गौर से ,
देखा तो होता , 
मेरी परछाई मैँ भी ,
तुम नजर आते हो दोस्त"
. ."जय" . . .04/08




पानी पानी सब कहेँ , 
पानी जीवन की भोर । 
उनका पानी मर गया , 
जिनपर राजनीति का जोर ।। 
"
जय" शुभ रात्रि दोस्तो 08



मोरो मन चंचल भयो , 
उड़के गयो आकाश । 
ढूड़त हरि को जग मैँ , 
जो भीतर है प्रकाश ।। 
"जय 08

 

मन मोदक तोरो भयो , 
तन गुलाब जामुन होय । 
बिन जनता मैँ जायेँ जब, 
पी एम पद पाओ होय ।। 
"जय" 08 

अबकी साँवन ऐँसो बरसो , 
रोम रोम भीग गयो मोरो । 
हरि चुनरिया भीग रही , 
और भीग गयो तन गोरो ।। 
"जय" 08/08

राम रहीम काशी काबा , 
सब मैँ एक रब का नूर । 
हम एक रहे जीवन भर , 
यही दुआ है मेरी हुजूर ।।
"जय"  09



अब तक मै सोचत रहो , 
जा दुनिया है अनमोल ।
एक दिन अपने से मिलो , 
समझा दुनिया माटी मोल ।। 
"जय"  10

उल्लू कहे कोयल से , 
मोहे नौनो राग सुनाओ । 
ज्योँ गुबरीला कहे , 
मोहे गोबर मै ले जाओ ।। 
"जय"  10





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